Bank Closed : आरबीआई ने कई बैंकों पर लगाई बड़ी पाबंदी, देश का चर्चित बैंक हुआ बंद – ग्राहकों की जमा पैसा डूबा।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने देश के बैंकिंग सिस्टम में पारदर्शिता और ग्राहकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक बार फिर बड़ा कदम उठाया है। 2025 की शुरुआत में ही RBI ने कई सहकारी बैंकों पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और नियमों के उल्लंघन के चलते सख्त प्रतिबंध लगाए हैं। इनमें से एक बैंक इतना बड़ा और प्रसिद्ध है कि उसके लाइसेंस रद्द होने की खबर से ग्राहकों में भय और चिंता का माहौल बन गया है। RBI का कहना है कि यह कदम जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा और बैंकिंग सिस्टम को पारदर्शी बनाए रखने के लिए उठाया गया है।

RBI ने कई बैंकों पर लगाई बड़ी पाबंदी?

RBI ने अपने हालिया नोटिस में बताया कि कई Urban Cooperative Banks (UCBs) और Credit Societies में वित्तीय अनियमितताएं पाई गईं। इन बैंकों में पूंजी अनुपात में कमी, NPA (Non-Performing Assets) का बढ़ना और अकाउंटिंग में गड़बड़ी जैसी गंभीर बातें सामने आईं। इसी कारण, RBI ने बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, 1949 के तहत इन पर रोक लगाई है।इस कार्रवाई के बाद संबंधित बैंकों को नए खाते खोलने, लोन देने, और बड़े वित्तीय लेन-देन करने से रोका गया है। अब इन बैंकों के ग्राहक केवल सीमित सीमा तक ही अपना पैसा निकाल सकेंगे।

ग्राहकों के लिए क्या हैं RBI के नियम?

RBI ने यह भी साफ किया है कि प्रतिबंधित बैंकों के ग्राहक DICGC (Deposit Insurance and Credit Guarantee Corporation) के नियमों के तहत सुरक्षित हैं। इस योजना के अनुसार, अगर किसी बैंक का लाइसेंस रद्द होता है या वह बंद हो जाता है, तो हर ग्राहक को अधिकतम ₹5 लाख तक की जमा राशि वापस मिलेगी। इसमें बचत खाता, चालू खाता, फिक्स्ड डिपॉजिट और रिकरिंग डिपॉजिट सभी शामिल हैं।

आरबीआई का उद्देश्य क्या है?

RBI का कहना है कि उसका उद्देश्य बैंकों को बंद करना नहीं बल्कि बैंकिंग व्यवस्था को मजबूत बनाना है। जिन संस्थानों में वित्तीय नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, वहां ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए यह कदम उठाया जाता है। RBI लगातार देशभर के बैंकों की ऑडिटिंग कर रहा है ताकि किसी भी तरह की धोखाधड़ी या गड़बड़ी को समय रहते रोका जा सके।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से लिखा गया है। यहां दी गई जानकारी समाचार रिपोर्टों और आरबीआई के आधिकारिक दिशानिर्देशों पर आधारित है। किसी भी वित्तीय निर्णय से पहले बैंक या संबंधित प्राधिकरण से पुष्टि करें।

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